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नारदमोह की लीला देख भाव बिभोर हुए दर्शक

✍बृजेश पाण्डेय मुंगराबादशाहपुर (जौनपुर) श्रीराम लीला कमेटी गुडहाई के कलाकारो द्वारा शुक्रवार  की रात पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन क...



✍बृजेश पाण्डेय
मुंगराबादशाहपुर (जौनपुर) श्रीराम लीला कमेटी गुडहाई के कलाकारो द्वारा शुक्रवार  की रात पहले दिन नारद मोह की लीला का मंचन कर दर्शको को भाव बिभोर कर दिया | कैलास पवर्त पर बिराजमान भगवान शिवजी ने माता पार्वती को बताया कि देवर्षि नारद ने श्री हरि विष्णु को श्राप दिया था | जिसे सुन कर माता पार्वती  चकित हो कर  बोली की  नारद जी तो विष्णु भक्त और अत्यन्त ज्ञानी है| फिर उन्होने श्राप किस कारण से दिया? शिव जी ने हँस कर कहा इस संसार मे न तो कोई ज्ञानी है और न ही कोई मूर्ख | श्री रघुनाथ जी जब जिसको जैसा करते है वह उसी क्षण वैसा ही हो जाता है|  तुम्हे नारद जी की कथा सुनाता हूँ |हिमालय पर्वत पर एक पवित्र गुफा मे नारद जी श्री हरि के भक्ति मे लीन हो गये| नारद जी के इस तपस्या से देवराज इन्द्र भयभीत हो गये | इन्द्र ने नारद की तपस्या को भंग करने के लिये कामदेव को भेजा |

कामदेव देवर्षि  नारद की तपस्या भंग नही कर पाये जिससे देवर्षि  नारद को अहंकार हो जाता है|वे शकंर जी के पास जाकर सारा प्रसंग सुनाते है शंकर जी ने देवर्षि नारद को  यह प्रसंग विष्णु जी से बताने से मना करते है जो देवर्षि  नारद को बुरी लगी |  नारद जी हरि के पास जा कर कामदेव पर विजय पाने की चर्चा की तो  श्री हरि समझ गये की देवर्षि  नारद को अहंकार  हो गया है जिसे तोड़ने के लिये श्री हरि ने  माया से शीलनिधी नगर बसा दिया |वहा के राजा शीलनिधि नें नारद जी को बुलवा कर अपनी पुत्री बिश्व मोहनी  का हाथ दिखलाते है | नारद बिश्व मोहनी के हाथ की रेखा देखते ही चकित हो बिश्व मोहनी को पाने के लिए  श्रीहरि केे पास जाकर सुन्दर रूप मागते है | श्री हरि से रूप हासिल कर  नारद विश्व मोहिनी के स्वयंवर में पहुंच गए और साथ ही शिव जी के वे दोनों गण भी ब्राह्मण का रूप बना कर वहां पहुंच गए। वे दोनों गण नारद जी को सुना कर कहने लगे कि भगवान ने इन्हें इतना सुंदर रूप दिया है कि राजकुमारी सिर्फ इन पर ही रीझेगी। उनकी बातों से नारद जी मन ही मन बहुत खुश हुए। स्वयं भगवान विष्णु भी उस स्वयंवर में एक राजा का रूप धारण कर आ गए।

विश्व मोहिनी ने कुरूप नारद की तरफ देखा भी नहीं और राजा रूपी विष्णु के गले में वरमाला डाल दी। मोह के कारण नारद मुनि की बुद्धि नष्ट हो गई थी । राजकुमारी द्वारा अन्य राजा को वरमाला डालते देख देवर्षि नारद परेशान हो उठे। उसी समय शिव जी के गणों ने ताना कसते हुए नारद जी से कहा – जरा दर्पण में अपना मुंह तो देखिए। मुनि ने जल में झांक कर अपना मुंह देखा और अपनी कुरूपता देख कर गुस्सा हो उठें। गुस्से में आकर उन्होंने शिव जी के उन दोनों गणों को राक्षस हो जाने का शाप दे दिया। उन दोनों को शाप देने के बाद जब मुनि ने एक बार फिर से जल में अपना मुंह देखा तो नारद जी को अपना असली रूप वापस मिल गया था। लेकिन भगवान विष्णु पर उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था , क्योंकि विष्णु के कारण ही उनकी बहुत ही हंसी हुई थी। वे उसी समय विष्णु जी से मिलने के लिए चल पड़े। रास्ते में ही उनकी  मुलाकात विष्णु जी जिनके साथ लक्ष्मी जी और विश्व मोहिनी भी थीं , से हो गई। उन्हें देखते ही नारद जी ने कहा आप दूसरों की खुशियां देख ही नहीं सकते। आपके भीतर तो ईर्ष्या और कपट ही भरा हुआ है। समुद्र- मंथन के समय आपने श्री शिव को बावला बना कर विष और राक्षसों को मदिरा पिला दिया और स्वयं लक्ष्मी जी और कौस्तुभ मणि को ले लिया। आप बड़े धोखेबाज और मतलबी हो। हमेशा कपट का व्यवहार करते हो। हमारे साथ जो छल किया है उसका फल जरूर पाओगे। आपने मनुष्य रूप धारण करके विश्व मोहिनी को प्राप्त किया है इसलिए मैं आपको श्राप  देता हूं कि आपको मनुष्य जन्म लेना पड़ेगा । आपने हमें स्त्री से दूर किया है ,इसलिए आपको भी स्त्री से दूरी का दुख सहना पड़ेगा और आपने मुझको बंदर का रूप दिया इसलिए आपको बंदरों से ही मदद लेना पड़े। नारद के शाप को श्री विष्णु ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया और उन पर से अपनी माया को हटा लिया। माया के हट जाने से अपने द्वारा दिए श्राप  को याद कर के नारद जी को बहुत दुख हुआ किन्तु दिया गया श्राप  वापस नहीं हो सकता
था। इसीलिए श्री विष्णु को श्रीराम के रूप मेंमनुष्य बन कर अवतरित होना पड़ा।

राम लीला मे भगवान शिव की भूमिका देबी प्रसाद गुप्त ,पार्वती जी की भूमिका चंदन कसेरा श्री हरि बष्णु की भूमिका दीपक गुप्त  व नारद की भूमिका राकेश जायसवाल ने अदा की | संचालन राजीव गुप्त ने किया | इस अवसर पर राम लीला कमेटी के अध्यक्ष पशुपति नाथ गुप्त ,निर्देशक लाल बहादुर सिंह ,महन्त संगम लाल गुप्त सहित राम लीला कमेटी के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओ के साथ ही भारी संख्या मे दर्शक उपस्थित रहे

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