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कहीं विदेश में तो नही रची गई इरफाना के हत्या की साजिश

अज़ीम सिद्दीकी खेतासराय जौनपुर 13 फरवरी  कोतवाली शाहगंज क्षेत्र के मजडीहा गांव के समीप सनराइज स्कूल के सामने मंगलवार दोपहर अज्ञात नकाबपोश...


अज़ीम सिद्दीकी
खेतासराय जौनपुर 13 फरवरी
 कोतवाली शाहगंज क्षेत्र के मजडीहा गांव के समीप सनराइज स्कूल के सामने मंगलवार दोपहर अज्ञात नकाबपोश बदमाशों ने टैम्पो पर सवार महिला को सरे राह गोलियों से छलनी कर मौत के घाट उतार दिया गया। घटना में पुलिस ने मृतका के भाई की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरु की। लेकिन घटना की गहराई तक जाना जरुरी नहीं समझा।

देर रात मृतका के भाई बिसेखां निवासी अबूजर की तहरीर पर पुलिस ने मृतका के जेठ भुड़कुड़हां गांव निवासी अब्दुर्रहमान उर्फ दानिश व देवर मो. मुस्तकीम सहित अज्ञात के विरुद्ध  मुकदमा कायम करके अपनी इतिश्री करली। लेकिन पूरा मामला बिल्कुल इसके विपरीत दिखाई दे रहा है। अगर ससुराली जन को हत्या करना होता तो शादी के बाद से ही पति पत्नी में सम्बन्ध मधुर नही थे। दोनों अलग रहते थे। अगर ससुराली जन हत्या करना ही चाहते तो बहुत पहले ही कोई और संदिगध तरीके का इस्तेमाल कर सकते थे। यह भी स्पष्ट है कि तलाक के बाद महिला ने किसी तरह की तहरीर पुलिस को देकर सुरक्षा की गुहार नही लगाई थी। तलाक की मौखिक जानकारी खेतासराय पुलिस को दिया था। अगर मृतिका को जान का भय था तो उसने किसी तरह की सुरक्षा की गुहार क्यों नही लगाई? अगर डर होता तो तलाक के बाद वह खेतासराय अकेले क्यों आती? जब कि उसका निवास शाहगंज में ही था।
यदि हत्या के बाद पुलिस सर्विलांस से जांच करती तो सही कातिल के करीब होती। मृतका का फोन भी हत्या के बाद बरामद नही हुआ। घटना क्रम से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि घटना को अंजाम कांट्रैक्ट किलर ने ही दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हत्यारे प्रोफेशनल ही थे। अगर धार्मिक तरीक़े से देखा जाये तो तलाक के बाद इद्दत
(अज्ञातवास) में क्यों नही गयी। मुस्लिम रीति रिवाज से देखा जाये तो तलाक या विधवा होने पर इद्दत की तय शुदा मुद्दत गुजारनी होती है।

उक्त प्रकरण में बिना जांच के अनन फानन में मुकदमा कायम करना तथा पुलिस द्वारा बिना जांच के किसी को मुल्जिम बना देना कुछ अटपटा से लगता है। सूत्रों की मानें तो वैवाहिक जीवन में अनबन से लेकर सम्बन्द विच्छेदन का कारण विदेश रह रहे खेतासराय थाना क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित शख्स से रहा है। जिसका स्वदेश लौटने पर बराबर घर तक आना जाना भी होता था। घटना में उक्त कड़ी को जोड़ना भी जरूरी है। घटना के बाद मृतका के पास न तो मोबाइल मिला और न ही उसका पर्स। मिला तो एक खाली थैला। जो बहुत से सवाल खड़ा कर रहा है।

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